
दिल्ली सरकार ने पिछले एक साल में सड़क परिवहन ढांचे के विकास हेतु 18 बड़ी परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ाया हैं। इनमे से 15 परियोजनाओं के व्यवहार्यता अध्ययन शुरू हो चुके हैं, जिनमे से 11 अंतिम चरण में हैं। इन प्रयासों का लक्ष्य अगले 4-5 वर्षों में दिल्ली को यातायात जाम से मुक्त करना है।
सड़क परिवहन से सम्बंधित ढांचा के विकास को गति देते हुए पिछले एक साल में 18 बड़ी परियोजनाओं पर काम को आगे बढ़ाया है। इन परियोजनाओं में तीन परियोजनाओं को छोड़ दें तो 15 परियोजनाओं के लिए काम शुरू हो चुका है। जिनमे से 11 परियोजनाओं का अध्ययन का अंतिम चरण में है और जल्द ही इन्हे मंजूरी के लिए यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोटशन इंफ्रास्ट्रक्चर (प्लानिंग और इंजिनीरिंग) सेंटर में भेजने की तैयारी चल रही है।
वही तीन परियोजनाओं के लिए सरकार ने व्यवहारता अध्य्यन के टेंडर जारी कर दिए हैं। दिल्ली के इतिहास में ढांचागत विकास के मामले में ऐतिहासिक है। उनकी माने तो राष्ट्र्यमंडल खेलों की तैयारियों की विशेष परिस्थितियों को छोड़ दें तो इससे पहले इस एरिया में इतनी तेजी से काम नहीं हुआ है। उनके अनुसार सभी परियोजनाओं पर इसी तेजी से काम हुआ तो आने वाले 4 से 5 साल में शहर को यातायात जाम मुक्त करने की अपील में बड़ी मजबूती मिल सकेगी।
व्यवहार्यता अध्ययन अंतिम चरण में
इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन से मुनक नहर पर हरियाणा की सीमा तक 20 किलोमीटर लम्बे एलिवेटड कॉरिडोर के निर्माण।
महात्मा गाँधी मार्ग यानि 55 किलोमीटर लम्बे रोड पर ट्रैफिक जमा करने के लिए काम
तीन किलोमीटर लम्बे एसएसएन मार्ग पर फ्लाईओवर बनाने की योजना
शिवाजी मार्ग पर जखीरा क्रॉसिंग से करमपुरा फ्लाईओवर तक 2.20 किमी एलिवेटेड कारिडोर
आइटीओ इंटरसेक्शन पर फ्लाईओवर/अंडरपास बनाकर मार्ग के 4 किमी भाग को जाम मुक्म करना और टी-एक आईजीआई एयरपोर्ट के सामने एनएसजी चौराहे पर दो किमी लंबे फ्लाईओवर का निर्माण।
व्यवहार्यता अध्ययन की अक्टूबर 2025 में दी गई मंजूरी, चल रहा काम
सप्लीमेंट्री ड्रेन केशोपुर डिपो से हैदरपुर हाेते हुए आउटर रिंग रोड तक एलिवेटेड कारिडोर का निर्माण के लिए व्यवहार्यता अध्ययन का काम हाल ही में विल्सन स्काट कंपनी को दिया गया है।
सागरपुर से मायापुरी चौक तक फ्लाईओवर का निर्माण के लिए व्यवहार्यता अध्ययन का काम क्राफ्ट्स कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड कर रही है।



